अमेरिका ने हिंद महासागर में टॉरपीडो से ईरान के युद्धपोत को डुबोने का किया दावा, श्रीलंका को 80 शव मिले

पीट हेगसेथ

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अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि हिंद महासागर में ईरान का एक युद्धपोत अमेरिका ने टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया है.

समुद्री जहाज़ को तबाह करने के लिए पनडुब्बी से टॉरपीडो को दागा जाता है. हालांकि, हेगसेथ ने उस ईरानी जहाज़ का नाम नहीं बताया जिसे डुबोया गया है.

इससे पहले श्रीलंकाई नौसेना ने बताया था कि 'आईआरआईएस डेना' हिंद महासागर में डूब गया है, जिसमें सवार लगभग 140 लोग लापता हैं.

अब देश के रक्षा मंत्रालय के सचिव एयर वाइस मार्शल सम्पथ थुइयाकोंठा ने बीबीसी सिंहला को बताया है कि हिंद महासागर में डूबे ईरानी जहाज़ पर सवार 80 लोगों के शव मिल गए हैं.

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, "हिंद महासागर में अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है."

उन्होंने बताया, "उसे एक टॉरपीडो से डुबो दिया गया है."

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अमेरिकी रक्षा मंत्री का दावा ग़लत निकला

1982 में जनरल बेलग्रानो

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अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि "दूसरे विश्व युद्ध के बाद टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज़ को डुबोने का यह पहला मामला है."

हालांकि बीबीसी संवाददाता टॉम एजिंगटन का कहना है कि यह दावा सही नहीं है.

1982 के फ़ॉकलैंड युद्ध के दौरान, अर्जेंटीना का एकमात्र क्रूज़र जनरल बेलग्रानो दक्षिण अटलांटिक में तब डूब गया था जब उसे ब्रिटेन की एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी से दागी गई दो टाइगरफिश टॉरपीडो ने निशाना बनाया था.

एक और घटना 1971 में हुई थी, जब भारतीय फ़्रिगेट आईएनएस खुखरी को पाकिस्तान की एक पनडुब्बी ने टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था.

हालांकि, अगर इसकी पुष्टि होती है, तो ईरानी युद्धपोत का डूबना 1945 के बाद पहली बार होगा जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने इस तरह किसी दुश्मन जहाज़ को डुबोया हो.

श्रीलंका ने ईरानी जहाज़ के डूबने की पुष्टि की

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इससे पहले श्रीलंका की नौसेना ने पुष्टि की थी कि उसने बुधवार की सुबह ईरानी नौसेना के जहाज़ 'आईआरआईएस डेना' से आपातकालीन कॉल मिलने के बाद 32 लोगों को बचाया है.

बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये को श्रीलंका की नौसेना के प्रवक्ता बुधिका सम्पथ ने बताया, "यह घटना हमारे समुद्री क्षेत्र से बाहर थी, लेकिन हमारे खोज और बचाव क्षेत्र के भीतर थी, इसलिए अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार हमें कार्रवाई करनी थी."

उन्होंने आगे कहा, "हमने पानी में तैरते हुए लोगों को पाया और उन्हें बचाया. बाद में पूछताछ में पता चला कि ये लोग एक ईरानी जहाज़ से थे."

प्रवक्ता के अनुसार जहाज़ के दस्तावेज़ों में बताया गया है कि जहाज़ पर क़रीब 180 लोग सवार थे, हालांकि लापता लोगों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है.

उन्होंने यह भी बताया कि जब बचाव अभियान शुरू किया गया, तब नौसेना को जहाज़ दिखाई नहीं दिया, लेकिन समुद्र में तेल के धब्बे और तैरते हुए लाइफ़ राफ़्ट मिले.

उन्होंने बीबीसी को यह भी बताया था कि वह इस दावे को ख़ारिज करते हैं कि जहाज़ को किसी पनडुब्बी ने निशाना बनाया था. उनका कहना था कि डूबने का कारण अभी अज्ञात है.

इससे पहले श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के सचिव एयर वाइस मार्शल सम्पथ थुइयाकोंठा ने बीबीसी सिंहला को बताया था कि क़रीब 140 लोग लापता माने जा रहे हैं.

अब तक श्रीलंका की सेना यह पुष्टि नहीं कर पाई है कि जहाज़ के डूबने की वजह क्या हो सकती है.

इससे पहले श्रीलंका के विदेश मंत्री ने संसद में घोषणा की थी कि नौसेना ने जहाज़ से सहायता के अनुरोध पर प्रतिक्रिया दी थी और स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे बचाव अभियान शुरू कर दिया था.

श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद को बताया कि "आईआरआईएस डेना" नाम के पोत से तड़के एक आपातकालीन संकेत मिला.

सूत्रों के मुताबिक़, अस्पताल ले जाए गए लोगों में से एक की मौत हो गई है.

वहीं, श्रीलंका के विपक्ष के एक सांसद ने सवाल उठाया था कि क्या ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका–इसराइल के हमलों के तहत इस जहाज़ पर बमबारी की गई थी.

ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज़ किए

यूएई में ईरानी हमले

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इमेज कैप्शन, ईरान यूएई समेत कई खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बना रहा है

इस बीच क़तर के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ईरान ने क़तर को दो बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है.

इनमें से एक मिसाइल को क़तर के एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने गिरा दिया, जबकि दूसरी मिसाइल अल उदैद स्थित अमेरिकी वायुसेना अड्डे पर गिरी. ये इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है.

क़तर का कहना है कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई.

वहीं इसराइल डिफेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ) के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाय अदरई ने कहा कि इसराइल ने तेहरान में दर्जनों सैन्य ठिकानों पर हमला किया है.

इन हमलों में बसीज मुख्यालय को निशाना बनाया गया, जो ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ा एक अर्धसैनिक बल है.

इसके अलावा मिसाइल लॉन्च पैड और रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया.

उन्होंने कहा कि आईडीएफ़ ईरानी शासन के बुनियादी ढांचे पर अपने हमलों को "और तेज़" करता रहेगा.

शनिवार से अमेरिका–इसराइल के हमले शुरू होने के बाद से, ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर सिलसिलेवार हमले किए हैं.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने एक वीडियो फ़ुटेज वैरिफ़ाई किया है. इसमें मंगलवार शाम ड्रोन हमले के बाद दुबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की इमारत में आग लगी दिखाई दे रही है.

एक वीडियो, जो वाणिज्य दूतावास से कुछ मीटर दूर एक चौराहे से फ़िल्माया गया है, उसमें एक ड्रोन इमारत से टकराता हुआ दिखाई देता है.

मंगलवार रात पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुष्टि की कि एक ड्रोन वाणिज्य दूतावास की मुख्य प्रशासनिक इमारत के पास स्थित "पार्किंग लॉट" में गिरा.

रुबियो ने कहा, "हम बहुत भाग्यशाली रहे हैं, लेकिन हमारे दूतावास और राजनयिक प्रतिष्ठान एक आतंकवादी शासन के सीधे हमले के निशाने पर हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.