Egg boil करने का क्या है सही तरीक़ा, क्या हम अंडा उबालने में ये ग़लती तो नहीं कर रहे?
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- Author, जैस्मिन फॉक्स स्केली
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
वैज्ञानिकों ने अंडे को उबालने का सही तरीक़ा ढूंढ लिया है. आश्चर्य की बात यह है कि इसमें आधे घंटे का समय लगता है.
यह ज़िंदगी के उन कुछ तथ्यों में से एक है कि एक परफे़क्ट अंडे को उबालना बेहद मुश्किल होता है.
जब आप अंडे का छिलका उतारते हैं और उम्मीद करते हैं कि अंदर का पीला हिस्सा नरम होगा जिससे आपका टोस्ट और भी स्वादिष्ट बन जाएगा.
लेकिन इसके बजाय, अगर पीला हिस्सा सूखा और बिखरा हुआ निकलता है और उससे भी बुरा अंडा आधा पका रह जाता है तो फिर नाश्ता कई बार निराशाजनक हो सकता है.
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कितने तरीक़ों से अंडे को पकाया जा सकता है?
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समस्या यह है कि पीला हिस्सा और ऐल्बूमेन (अंडे का सफ़ेद भाग) दोनों अलग-अलग तापमान पर पकाए जाते हैं.
पीले हिस्से को पकने के लिए 65 डिग्री सेल्सियस (149 फारेनहाइट) तापमान की ज़रूरत होती है तो वहीं ऐल्बूमेन को इससे थोड़े ज़्यादा तापमान यानी 85 सेल्सियस (185 फारेनहाइट) तापमान की ज़रूरत होती है.
इसलिए पारंपरिक तरीके़ से पकाने पर पीले हिस्से और ऐल्बूमेन के लिए दो अलग-अलग तापमानों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता है.
अगर अंडे को 100 सेल्सियस (212 फारेनहाइट) पर उबाला जाए, तो उसका ऐल्बूमेन अच्छी तरह पक जाता है और मुलायम होता है.
लेकिन पीला हिस्सा पूरी तरह से सख़्त हो जाता है यह उन लोगों के लिए ठीक है जिन्हें ये सख़्त रूप में पसंद है, लेकिन अगर आपको पीला हिस्सा नरम चाहिए तो यह तरीक़ा आपके लिए सही नहीं है.
अंडा पकाने का एक और तरीक़ा सू विडे है जिसमें अंडे को 60 से 70 सेल्सियस के बीच हल्के गर्म पानी में एक घंटे तक रखा जाता है.
इससे पीला हिस्सा नरम बना रहता है, लेकिन ऐल्बूमेन पूरी तरह से नहीं पकता और गीला रहता है.
हालांकि अब चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि शोधकर्ताओं ने अंडा उबालने का एक सही तरीक़ा ढूंढ लिया है. ख़ास बात यह है कि इससे न केवल स्वाद बेहतर होता है, बल्कि यह सेहत के लिए भी अधिक फ़ायदेमंद साबित होता है.
वैज्ञानिकों का अंडे उबालने का सही तरीक़ा क्या है?
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इटली के पोजुओली में नेशनल रिसर्च काउंसिल के वैज्ञानिक पेल्लेग्रीनो मुस्तो और उनकी टीम ने अपने नए शोध में सबसे पहले कंप्यूटर की मदद से यह समझने की कोशिश की कि अंडा पकाने की प्रक्रिया कैसे काम करती है.
उन्होंने इसके लिए एक तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे कम्प्यूटेशनल फ़्लुइड डायनेमिक्स (सीएफ़डी) कहा जाता है.
सीएफ़डी एक तकनीक है जिसमें कंप्यूटर की मदद से यह पता लगाया जाता है कि तरल पदार्थ और गैसें कैसे बहती हैं. यह प्रक्रिया कुछ वैज्ञानिक नियमों पर आधारित होती है, जैसे द्रव्यमान, गति और ऊर्जा का संतुलन.
इस शोध में वैज्ञानिकों को अंडा पकाने का एक नया तरीक़ा मिला, जो अधिकतर शेफ़ और घरेलू रसोइयों के लिए नया हो सकता है, लेकिन इसके नतीजे बेहतर हो सकते हैं.
इस तकनीक को पीरियोडिक कुकिंग कहा जाता है. इसमें अंडे को पहले उबलते पानी (100 सेल्सियस/212 फारेनहाइट) में डाला जाता है और फिर हल्के गुनगुने पानी (30 सेल्सियस/86 फारेनहाइट) में रखा जाता है.
बेहतर परिणाम पाने के लिए अंडे को हर दो मिनट में दोनों तापमानों के बीच बदलते रहना पड़ता है और यह प्रक्रिया कुल 32 मिनट तक चलती है. इसलिए, यह तरीक़ा उन लोगों के लिए सही नहीं है जो अंडे को उबलने के लिए छोड़कर दूसरी चीज़ों में व्यस्त हो जाते हैं.
लेकिन अगर आप इस तरीके़ को अपनाने के लिए तैयार हैं, तो इसका नतीजा शानदार होगा.
जब वैज्ञानिकों ने इस तरीके को आज़माया, तो उन्होंने पाया कि इससे अंडे का स्वाद और बनावट बेहतरीन हो जाती है.
उन्होंने न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) और हाई-रिज़ोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एचआरएमएस) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके अंडे की बनावट, स्वाद और रासायनिक संरचना की जांच की.
परिणामों में पता चला कि इस तरीके़ से पकाए गए अंडे की ज़र्दी (पीला हिस्सा) सू विडे तरीके़ से बने अंडे की तरह ही नरम और क्रीमी बनी रहती है.
लेकिन सू विडे अंडे के विपरीत, इसकी ऐल्बूमेन गीली और अधपकी नहीं थी, बल्कि पारंपरिक तरीके से उबाले अंडे की तरह मुलायम और सही बनावट वाली थी.
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस तरीके़ में ऐल्बूमेन का तापमान 35 सेल्सियस (95 फारेनहाइट) से 100 सेल्सियस (212 फारेनहाइट) के बीच बदलता रहता है, जबकि पीले हिस्से का तापमान स्थिर रूप से 67 सेल्सियस (153 फारेनहाइट) बना रहता है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि वैज्ञानिकों ने पाया कि पीरियोडिक कुकिंग के तरीके़ से पकाए गए अंडों के पीले हिस्से में अन्य तरीक़ों से पकाए गए अंडों की तुलना में ज़्यादा पॉलीफेनोल्स होते हैं.
पॉलीफेनोल्स ऐसे सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, जो ज़्यादातर पौधों में पाए जाते हैं और सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.
ये तत्व एंटीऑक्सीडेंट और सूजन को कम करने वाले (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुणों के लिए जाने जाते हैं.
पौधे इन्हें खुद को सूरज की तेज़ किरणों, सूखे या कीटों से बचाने के लिए बनाते हैं. लेकिन अब शोध से पता चला है कि ये इंसानों के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकते हैं.
उदाहरण के लिए, कई अध्ययनों से पता चला है कि अगर हमारे खाने में पॉलीफेनोल्स की मात्रा ज़्यादा हो, तो यह हृदय रोग, कुछ प्रकार के कैंसर और दिमाग से जुड़ी बीमारियों (जैसे अल्ज़ाइमर) का ख़तरा कम कर सकता है.
तो अगली बार जब आप नाश्ते में उबले अंडे और टोस्ट खाने की सोचें, तो पीरियोडिक कुकिंग आज़माने का यह एक और अच्छा कारण हो सकता है!
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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