ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा की तैयारियों के बीच इसराइल ने किस तरह की दी चेतावनी

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इमेज कैप्शन, अमेरिका और इसराइल के हमले में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई मारे गए हैं
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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह को टाल दिया गया है. यह जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया ने दी है.

दरअसल, आज से ही तीन दिन तक चलने वाली अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होनी थी. सोशल मीडिया पर तस्वीरें भी आई थीं जिनमें तैयारियों को दिखाया गया था.

लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक़, आयोजकों ने कहा है कि जब तक ज़रूरी इंतज़ाम पूरे नहीं हो जाते, तब तक इसे टाल दिया गया है. हालांकि, अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि अंतिम संस्कार कब होगा.

इससे पहले ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा था कि तेहरान की इमाम ख़ोमेनी मस्जिद में बुधवार रात 10 बजे से यह विदाई समारोह शुरू होगा.

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इस समारोह का आयोजन इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा किया जा रहा था और यह तीन दिनों तक चलने वाला था.

ख़ामेनेई के लिए प्रार्थना सभा 6 मार्च को आयोजित की जाती. तीन दिन के समारोह के बाद उनके पार्थिव शरीर को दफ़ना दिया जाता.

ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरू और नेता अली ख़ामेनई अमेरिका-इसराइल के हमले में मारे गए थे. उनके साथ ईरान के कई और शीर्ष नेता और कमांडर मारे गए थे.

अगला सुप्रीम लीडर कौन?

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इमेज कैप्शन, ईरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनई के पार्थिव शरीर को दफ़नाने की तैयारी की जा रही है
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इसी बीच, ईरान में अगला सर्वोच्च धर्मगुरू कौन होगा इसे लेकर कोई अधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि ये माना जा रहा है कि बुधवार को नए सुप्रीम लीडर की घोषणा की जा सकती है.

लेकिन मीडिया रिपोर्टों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के बेटे मोज़तबा ख़ामेनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में चुनने की संभावना सबसे ज़्यादा मानी जा रही है.

ईरानी मीडिया की रिपोर्टोें के मुताबिक़ ईरान में सुप्रीम लीडर चुनने की ज़िम्मेदारी संभालने वाली ‘असेम्बली ऑफ़ एक्सपर्ट्स’ ने मतदान की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन आधिकारिक नतीजे फ़िलहाल घोषित नहीं हुए हैं.

इसी बीच, मंगलवार को इसराइल ने क़ुम शहर में धार्मिक परिषद के मुख्यालय को निशाना बनाया था. इस हमले में परिषद का सचिवालय ध्वस्त हो गया. हालांकि, हमले में मारे गए लोगों के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सत्ता का हस्तांतरण मोज़तबा के हाथों में जाता है, तो यह ईरान में परिवार-आधारित धार्मिक शक्ति के नए दौर की शुरुआत होगी और इससे देश के भीतर सत्ता संघर्ष और तेज़ हो सकता है.

इसराइल की चेतावनी

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इमेज कैप्शन, 56 साल के मोज़तबा ख़ामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर माना जा रहा है

ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को दफ़नाने के समारोह के बीच इसराइल ने ईरान के अगले नेता को निशाना बनाने की चेतावनी दी है.

इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने चेतावनी दी है कि ईरान के मृत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के स्थान पर आने वाला कोई भी नेता अगर "इसराइल को नष्ट करने की योजना" या "अमेरिका और स्वतंत्र दुनिया को धमकाने" जैसी नीतियां जारी रखेगा, तो वह इसराइल की "सीधी कार्रवाई" का निशाना बनेगा.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान में आयतुल्लाह ख़ामेनेई के लिए तीन दिन के ‘विदाई समारोह’ की शुरुआत हो चुकी है.

कात्ज़ ने अपने बयान में कहा, “जो भी व्यक्ति इस आतंकवादी शासन द्वारा चुना जाएगा और इसराइल को नष्ट करने या अमेरिका व मुक्त विश्व को धमकाने के एजेंडे को आगे बढ़ाएगा, उसका नाम या ठिकाना चाहे जो भी हो, उसे समाप्त कर दिया जाएगा.”

इससे पहले जब इसराइल ने हिज़्बुल्लाह के शीर्ष कमांडर हसन नसरल्लाह को मारा था तब भी उनकी जगह लेने वाले कमांडर को इसराइल ने मार दिया था.

वहीं, ख़ामेनेई की मौत के बाद एक बयान में अमेरिका ने दावा किया था कि ख़ामेनेई के साथ ईरानी शासन से जुड़े 49 अन्य शीर्ष लोग भी मारे गए थे.

हमलों के बीच तेहरान में शोक

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इमेज कैप्शन, युद्ध के पांचवें दिन भी राजधानी तेहरान समेत ईरान के कई इलाक़ों पर हमले जारी रहे

तीन दशक से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले अली ख़ामेनेई की मौत और उसके बाद इसराइल की सख़्त चेतावनी ने मध्य पूर्व को एक अस्थिर दौर में धकेल दिया है.

अमेरिकी और इसराइली हमलों ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है.

अमेरिका-इसराइल के ईरान के साथ युद्ध के पांचवें दिन भी राजधानी तेहरान समेत ईरान के कई इलाक़ों पर हमले जारी रहे.

इसराइल ने ईरान के सुरक्षा मुख्यालयों के अलावा मिसाइल केंद्रों और अन्य सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है.

इन हमलों के बीच तेहरान में अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई दी जानी है.

तेहरान ट्रैफ़िक पुलिस ने बड़ी भीड़ को देखते हुए मसल्ला और आसपास के इलाकों में कई सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लागू किए थे.

रिपोर्टों के मुताबिक़, अंतिम यात्रा और दफ़न समारोह मशहद शहर में होंगे, जो ख़ामेनेई का पैतृक इलाका और ईरान का धार्मिक केंद्र है.

ख़ामेनेई ने नहीं चुना था उत्तराधिकारी

ईरान में लगभग चालीस सालों तक शासन करने वाले सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई ने अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था.

1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से यह पहला मौक़ा होगा जब ईरान की धार्मिक परिषद किसी सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी.

अली ख़ामेनेई को अयातुल्लाह रूहुल्लाह ख़ुमेनी की मौत के बाद परिषद ने अचानक सुप्रीम लीडर चुना था.

ईरान के संविधान के तहत, सुप्रीम लीडर की मौत की स्थिति में, न्यायपालिका के प्रमुख और धार्मिक मामलों के प्रमुख की ट्रांजीशन परिषद तुरंत अंतरिम सरकार की ज़िम्मेदारी संभालने का प्रावधान है.

ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद भले ही ईरान 1979 के बाद से सबसे नाज़ुक दौर में हो लेकिन उसकी सत्ता बरक़रार है.

बरक़रार है ईरान की शासन व्यवस्था?

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इमेज कैप्शन, ईरानी सत्ता ने ख़ामेनेई की मौत के बाद भी स्थिरता दिखाने की कोशिश की है

अली ख़ामेनेई की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से सत्ता पर क़ब्ज़ा करने का आह्वान किया था.

वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी ऐसे ही संदेश देते हुए कहा था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन करना संभव है.

सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के अलावा ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. उनके अलावा आईआरजीसी के चीफ़ कमांडर मोहम्मद पाकपोर और रक्षा मंत्री अज़ीज़ नासिरजादेह भी मारे गए हैं.

हालांकि, अमेरिका-इसराइल के हमलों और सर्वोच्च नेता समेत कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बावजूद ईरान की सत्ता व्यवस्था बरक़रार है.

अमेरिका-इसराइल के हमले के बाद शनिवार को ही ख़ामेनेई की मौत की रिपोर्टें आने लगी थीं. अगले दिन रविवार सुबह ईरान के सरकारी मीडिया ने अली ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी थी.

इसके तुरंत बाद ही ईरान ने तीन सदस्य अस्थायी परिषद के गठन की घोषणा कर दी थी.

ईरान के सर्वोच्च नेता का चुनाव 88 सदस्यीय परिषद करती है. इस परिषद के सदस्य सीधे मतदान के ज़रिए आठ साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं.

अली ख़ामेनेई की मौत के बाद से ईरानी सत्ता ने स्थिरता और निरंतरता दिखाने के लिए क़दम उठाए हैं.

संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करके और अस्थायी शासन व्यवस्था बनाकर ईरानी सत्ता ने ये दिखाने की कोशिश की है कि सुप्रीम लीडर की मौत के बाद भी ईरानी शासन व्यवस्था बरक़रार है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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